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शुक्रवार, सितंबर 25, 2026

कुछ पल


 

जरूरी है

चुप चाप बैठना ।

बिना कुछ सोचे

शांत मन

शांत जल जैसा ।

हर बार शोर जरूरी नहीं होता

तेज कदमों की

भी जरूरत नहीं होती ।

जरूरी होता

मंद मुस्कान

और

कुर्सी पर पीठ को आराम देना ।

हल्की हवा आपको राहत देती है

उस नीले आकाश को निहारने के लिए ।

पीछे से आती एक तेज ध्वनि

सब कुछ

ख़राब कर देती है

जैसे

किसी इन्द्रधनुष का ओझल हो जाना ।





मिलने आऊँगा 

ठीक वैसे 

जैसे

 सुबह गुन - गुन पक्षी आया करती है। 

जैसे सुबह खिड़की खुलने पर धूप आया करती है ।

 ठीक वैसे जैसे 

हल्की ठंडी हवा

 मुझे एहसास दिलाती है

 तुम्हारे होने का ।

ठीक वैसे जैसे 

पेड़ से कोई पत्ता 

चुपके से जमीन पर आ गिरती है।