साहित्य का मुरीद हूँ ...कुछ लिखना चाहता हूँ ... बहुत कुछ पढ़ना अभी बाकी है ...
मिलने आऊँगा
ठीक वैसे
जैसे
सुबह गुन - गुन पक्षी आया करती है।
जैसे सुबह खिड़की खुलने पर धूप आया करती है ।
ठीक वैसे जैसे
हल्की ठंडी हवा
मुझे एहसास दिलाती है
तुम्हारे होने का ।
पेड़ से कोई पत्ता
चुपके से जमीन पर आ गिरती है।
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